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मुस्लिम-सुन्नी

नाहन...! इस ऐतिहासिक शहर की बात ही निराली है। कई अदभुत और चमत्कारिक घटनाएं यहां समय-समय पर घटित हुई हैं। यहां शहर में रहने वाले लोगों में आपसी सौहार्द का गजब का रिशता है। 

मुस्लिम समुदाय...! नाहन में रियासतकाल से रहता आया है। लेकिन इस शहर की एक अनोखी बात। जिसे ज्यादातर लोग शायद नहीं जानते हैं। नाहन में केवल सुन्नी समुदाय के ही लोग रहते हैं। शिया समुदाय के लोगों का यहां आवास नहीं है। 
नाहन में हिंदू मुस्लिम भाईचारा। वास्तव में रियासतकालीन साम्राज्य की देन है। कहते हैं सिरमौर नरेशों द्वारा कभी भी। किसी मुस्लिम के साथ भेदभाव नहीं किया गया। सिरमौर नरेशांे ने जो परम्पराएं स्थापित की। आज तक नाहन में जन समुदाय द्वारा उसे निभाता जा रहा है।
आपको एक बात और जानकर हैरानी होगी। मुस्लिम परम्पराओं के अनुसार मोहम्मद की शहादत को ताजिये के रूप में आयोजित किया जाता है। इस आयोजन को देश क्या दुनिया भर में केवल शिया समुदाय के लोग निभाते हैं। किन्तु सिरमौर जिला मुख्यालय का नाहन। एक ऐसा स्थान है। जहां सुन्नी समुदाय के लोग मुहम्मद की शहादत पर निकलने वाले ताजिए को। ठीक उसी श्रद्धा और सम्मान के साथ आयोजित करते हैं। जैसे शिया समुदाय के लोग करते हैं। 
नाहन देश भर में। हिंदू-मुस्लिम सांप्रदायिक सौहार्द का अनूठा उदाहरण प्रस्तुत करता है। यहां हिंदू और मुस्लमान भाईयांे की तरह रहते हैं। एक दूसरे के सुख-दुख और तीज-त्योहार में शामिल होते हैं। इस शहर का माहौल संाप्रदायिक सौहार्द की जिंदा मिसाल है। 
कहते हैं जब 1947 में भारत-पाक बंटवारा हुआ। देश भर में उत्पात मचा। लेकिन इस शहर के नागरिकों ने अपनी पुरानी मर्यादाओं का पालन किया। उन्होंने शहर में सांप्रदायिक सौहार्द बिगड़ने नहीं दिया। 
इस लिए....! हिमाचल के अन्य किसी भी भाग में! जब हिंदू-मुस्लिम सौहार्द की बात की जाती है। तो नाहन का जिक्र जरूर किया जाता है।
है न...! नाहन एक अदभुत और अद्वितीय शहर....! 

 

(नोटः उपलब्ध जानकारी के अनुसार हमने इस आर्टिकल को तथ्यपरक बनाने का प्रयास किया है। यदि आपको इसमें किसी तथ्य] नाम] स्थल आदि के बारे में कोई सुधार वांछित लगता है तो info@mysirmaur.com पर अपना सुझाव भेंजे हम यथासंभव इसमें सुधार करेंगे)

 

 

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