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डा. जगतराम-ग्रामीण पृष्ठभूमि की शिक्षा ने पहूंचाया मुकाम पर

 ” होनहार बीरवान के होत चिकने पात “!  अर्थात जिस व्यक्ति की दृढ़ इच्छा प्रबल हो , उसे अपनी मंजिल तक पहूंचने के लिए कोई नहीं रोक सकता है। यही कर दिखाया है, ग्रामीण परिवेश की पृष्ठभूमि से संबध रखने वाले  उस शख्स ने, जिसने अपनी  शिक्षा का शुभारंभ एक छोटे से गांव के प्राथमिक स्कूल से आरंभ  करके आज उतरी भारत के सर्वोच्च एंव प्रतिष्ठित  स्वास्थ्य संस्थान पीजीआई चण्डीगढ़ में निदेशक के महत्वपूर्ण पद पर आसीन होकर तथा अर्न्राष्ट्रीय स्तर एंक कुश्ल नेत्र विशेषज्ञ के रूप में अपनी अलग पहचान बनाकर  हिमाचल प्रदेश और विशेषकर जिला सिरमौर का नाम ऊंचा किया है । वह महान विभूति है डा0 जगतराम-जिनका जीवन लक्ष्य रहा है- सादा जीवन-उच्च विचार ।
    सिरमौर जिला के राजगढ़ के समीप पबियाना के साथ लगते छोटे से गांव पटाड़िया में  17 अक्तूबर, 1956 को  डा0 जगत राम का जन्म एक सामान्य परिवार में हुआ । इनके पिता श्री ध्यानूराम पेशे से एक किसान है, जिन्होने निर्धनता की विपरित परिस्थितियों के बावजूद भी डा0 जगत राम को कभी भी आगे बढ़ने से नहीं रोका । डा0 जगत राम अपने दस भाई बहनों में दूसरे स्थान पर हैं, इनके अतिरिक्त पांच भाई और चार बहनें हैं । इन्होने प्राथमिक शिक्षा अपने गांव के स्कूल पबियाना में और मेट्रिक शिक्षा उच्च विद्यालय राजगढ़ से हासिल की थी । उसके उपरांत उन्होने सोलन से प्रेप की तत्पश्चात इनका चयन एमबीबीएस के लिए स्नोडन अस्पताल के लिए हुआ जिसे वर्तमान मेें इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज के नाम से जाना जाता है । वर्ष 1979 में डा0 जगतराम द्वारा पीजीआई में एमडी करने के लिए प्रवेश लिया और 1982 में नेत्र विशेषज्ञ के रूप में अपनी सेवाऐं पीजीआई में देनी आरंभ की  और आज इसी संस्थान के उस मुकाम पर इन्होने दस्तक दी है जहां पर बहुत कम लोग पहूंच सकते है ।
    डा0 जगत राम बचपन से ही सरल स्वभाव व सादगी में रहना पसंद करते थे । उनके राजगढ के एक  सहपाठी ललित किशोर शर्मा इनकी कामयाबी से काफी उत्साहित है और अपने स्कूल समय के अनुभवों को सांझा करते हुए कहा कि डा0 जगत राम स्कूल समय में मलेशिया अर्थात एक बहुत सस्ती किस्म का कपड़ा पहनकर आते थे परन्तु कक्षा में सदैव अव्वल रहते थे । उनका बताया कि डाक्टर बनना एक ड्रीम प्रोजेक्ट था जोकि उन्होने अपने कठिन परिश्रम और पुरूषार्थ से हासिल किया है ।
    डा0 जगत राम ने पीजीआई में विभिन्न पदों रहकर अपनी सेवाऐं दी है । निदेशक के पद पर आसीन होने से पूर्व डा0 जगतराम पीजीआई के नेत्र विज्ञान विभाग में बतौर प्रोफेसर कार्यरत थे ,इस दौरान इन्हें नेत्र विशेषज्ञ में प्रवीणता एंव योग्यता के आधार पर राष्ट्रीय एवं अर्न्राष्ट्रीय स्तर पर अनेकों बार सम्मानित भी किया गया । इनके द्वारा अबतक 32 शोधपत्र भी लिखे जा चुके हैं, जिसके लिए इन्हें राष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कृत किया गया । देश के लिए यह गौरव का विषय हैं कि मोतियाबिंद एवं अपवर्तक सर्जरी सोसायटी ऑफ अमेरिका द्वारा वर्ष 2016 के वार्षिक सम्मेलन के अवसर पर प्रो0 डेविड आर हरडेंट द्वारा  दूसरी बार डा0 जगत राम को बेस्ट ऑफ द बेस्ट अवार्ड से विभूषित किया गया था । 
 अपने अनुभवों को सांझा करते हुए डा0 जगतराम अपनी सफलता का श्रेय अपने पूज्य माता-पिता को देते हैं, जिन्होने विपरित परिस्थितियों के बावजूद भी उन्हें इस मुकाम तक पहूंचाया है । उनका कहना है कि  अतीत में लोगों के पास आय के कोई ठोस साधन नहीं थे, केवल पांरपरिक कृषि पर निर्भरता थी । इसके अतिरिक्त शिक्षा के साधन भी सीमित थे । उन्होने कहा कि प्रशिक्षण दौरान भी उन्हें काफी आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ा, परन्तु अपने डाक्टर बनने के सपने को चूर नहीं होने दिया ।  इनका कहना है कि उनका उददेश्य चिकित्सक बनकर पीड़ित व्यक्तियों की सेवा करना है। भाग्य विडंबना है कि जिस पीजीआई के बाहर खुले मैदान में  एमडी की परिक्षा देने के दौरान  रात गुजारी थी आज डा जगतराम उसी संस्थान के प्रमुख बन गए हैं ।
    डा0 जगतराम जिस पृष्ठभूमि से निकलकर अपने मुकाम को हासिल किया है , अपने आप में एक अभूतपूर्व मिसाल है और इन्होने यह भी सिद्ध करके दिखा दिया कि कॉनवेंट स्कूल की अपेक्षा ग्रामीण सरकारी स्कूलों में  शिक्षा ग्रहण वाले बच्चें भी उच्च पद पर पहूंुच सकते है जिसके लिए दृढ़ इच्छा, एक लक्ष्य और कड़ी मेहनत की आवश्यता होती है ।